HIV Ke Lakshan in Hindi – एचआईवी होने के लक्षण – HIV Ka ilaj

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आज हम एचआईवी के बारे मे बता रहे है। यह एक लाइलाज बिमारी है। एचआईवी वायरस के बारे में जटिल बात है उसका तेजी से रूप बदल लेना, संक्रमित शरीर के भीतर भी एचआईवी वायरस के कई टाइप हैं, हालांकि इनमें से दो मानव शरीर को संक्रमित करने में प्रमुख हैं एक संक्रमित शरीर में बाहरी संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी तैयार करने में आम तौर पर छह हफ्ते लगते हैं इस बीच एचआईवी टेस्ट करना बेकार है। एचआईवी संक्रमित होने पर शुरुआती लक्षण फ्लू जैसे होते हैं यह पहली बार होता है जब शरीर बाहरी वायरस का असर दिखाता है।

 

HIV Ke Lakshan

> नाखूनों में बदलाव होना, एचआईवी से नाखूनों में बदलाव, एचआईवी से संक्रमित होने पर नाखूनों में भी परिवर्तन नजर आने लगता है। नाखून या तो टूटने लगते हैं या फिर इनका रंग बदल जाता है।

> यदि किसी व्यक्ति को बहुत ज्यादा थकान महसूस हो, दिन के ज्यादातर समय सुस्त रहे, तो सावधान हो जाइए क्योकि यह एचआईवी का लक्षण हो सकता है। एचआईवी संक्रमण के शुरुआती चरण और बाद के समय में भी थकावट का लक्षण देखने को मिलता है।

> अगर आपको अचानक अपने वजन में बदलाव महसूस हो या फिर आपको लगे कि आपका वजन सामान्य की तुलना में ज्यादा तेजी से कम हो रहा है, तो सावधान हो जाइए। यह एचआईवी का लक्षण हो सकता है। वजन कम होने को एडवांस इलनेस के के रूप में भी देखा जाता है। इसका मतलब यह होता है कि आपका इम्यून सिस्टम बुरी स्थिति में पहुंच गया है।

> अगर आपको लगातार खांसी रहे सूखी खांसी भी एचआईवी का लक्षण है। हो सकता है कि आपको लगे कि खांसी डस्ट एलर्जी के कारण है, पर समय के साथ-साथ आपको लगेगा कि स्थिति बदतर होती जा रही है।

> अगर आपके मसल्स और जोड़ों में तेज दर्द हो तो एचआईवी टेस्ट जरूरी कराएं। ऐसा एचआईवी के कारण हो सकता है। हर साल विश्व एड्स दिवस के अवसर पर एचआईवी ग्रस्त व्यक्ति से जुडी कई बातों को सामने लाया जाता है।

> अगर सिर दर्द आपकी जिंदगी का हिस्सा बन गया है तो आप अपना एचआईवी टेस्ट जरूर कराएं। यह एचआईवी का शुरुआती लक्षण होता है और इसे एआरएस कहा जाता है।

> अपनी त्वचा पर ध्यान दें। एचआईवी से संक्रमित होने पर शुरुआती समय में या बाद में त्वचा पर ददोरा निकल आते हैं। साथ ही त्वचा पर कई जगह पर फोड़े भी निकल आते हैं और खुजली भी होती है। इसलिए आप अपनी त्वचा पर बारीकी से नजर रखें।

> अगर किसी व्यक्ति के खून में एचआईवी का वायरस आ जाता है तो वो सबसे पहले व्यक्ति को कमजोर करना शुरू करता है और इसी वजह से व्यक्ति को हर दुसरे तीसरे दिन बुखार होने लगा है और ये बुखार भी काफी तेज होता है।

> एचआईवी पीड़ित व्यक्ति का मन हर समय उल्टी का रहता है और दिन में 2 से 3 बार तो कर भी देता है खासतौर पर खाना खाने के बाद

> आपने अनुभव किया होगा कि जब आप ज्यादा देर तक पानी नही पीते हो तो आपका अजीब सा हो जाता है किन्तु अगर आप नियमित रूप से अच्छा पानी पीते हो फिर भी आपके गलें में खराश या पकड़न महसूस हो रही है तो ये आपके लिए बुरा संकेत है। इस स्थिति में समझ जाएँ कि वायरस ने अपना कार्य शुरु कर दिया है।

> मांसपेशियों में खिंचाव के साथ साथ संक्रमित व्यक्ति के घुटनों, कंधों या बाकी के जोड़ों में दर्द और सुजन होनी शुरू हो जाती है। इस स्थिति में आपको जल्द से जल्द एचआईवी की जांच करा लेनी चाहियें।

> एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति को हर छोटी छोटी बात पर बेवजह चिंता होने लग जाती है। इस स्थिति में ये अपने पास समस्या ना होते हुए भी उन्हें बुलाते रहते है। ऐसे लोगो का दिल बहुत
कमजोर हो जाता है और ये बात बात पर रोने लगते है।
 

हृदय(दिल):

एचआईवी हृदय में साफ़ होकर शरीर में जानने वाली नाली को प्रभावित कर देता है ताकि शरीर को साफ खून ना मिल सके, इस तरह ये हृदय पर भी खतरा बन जाता है। जो आपकी छाती में दर्द और खांसी में खून का कारण बनता है। इस स्थिति में आपको शरीर के T सेल की संख्या को जांचना चाहियें।

 

बचाव:

जब भी आप टिका लगवायें तो उस वक़्त नयी सुई का इस्तेमाल करें। इसी तरह जब आप दाढ़ी बनवाते हो तो वहां आप नये ब्लेड का
ही इस्तेमाल करें। एक साथी से अधिक के साथ शारीरिक संबंध ना बनायें और ना ही समलैंगिक संबंध बनायें।
 
दूध: नवजात बच्चों को एचआईवी संक्रमण से बचाने और उपचार के लिए गाय का दूध मददगार हो सकता है। एक ताजा स्टडी के मुताबिक, गाय के दूध में एक प्रोटीन की संरचना में फेरबदल कर इसमें एंटी-रेट्रोवायरल दवा को घुलनशील बनाने का नया तरीका खोज निकाला है, जिससे गाय का दूध इलाज के लिए बेहतर दवा साबित हो सकता है।
 
लहसुन: अध्ययनों के अनुसार एचआईवी/एड्स के लिए दवा लेने वाले रोगियों के लिए लहसुन का सेवन कभी-कभी खतरनाक भी हो सकता है।
 



 

एच आई वी कैसे होता है?

एड्स रोग से ग्रस्त व्यक्ति का खून अगर किसी स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में चढ़ा दिया जाए तो उसे भी एड्स रोग हो जाता है। एच.आई.वी. अर्थात एड्स के रोग इंजैक्शन को अगर किसी स्वस्थ व्यक्ति को लगा दिया जाए तो उसके विषाणु उस व्यक्ति के शरीर में पहुंचकर उसे भी इस रोग से ग्रस्त कर देते हैं।

इसी तरह इसके कई और भी कारण है जो से वह बिमारी और आगे फैलती है आज इस बिमारी से बहुत से लोग पीड़ित हैं। और यह बीमारी आगे बढ़ती ही जा रही है।
 

एच आई वी कैसे नहीं होता है?

एच आई वी किस प्रकार से नहीं मिल फैलता? प्रतिदिन के सामाजिक सम्पर्कों से एच आई वी दूसरे तक नहीं पहुंचता जैसे कि एक ही टॉयलेट का प्रयोग करना, एक ही बर्तनों को इस्तेमाल करना, हाथ मिलाना, गले मिलना आदि। मच्छर जैसे कीड़ों के काटने या पालतू पशुओं से और खांसी/छीकों से भी एच आई वी नहीं फैलता है।

चुम्बन द्वारा भी एच आई वी नही होता है। एच आई वी से संक्रमित लोगों के मुख की लार में हालांकि वाइरस हो सकता है पर लार से एच आई वी का संक्रमण नहीं होता।

यदि सम्भोग करते समय साथियों के मुंह में कुछ कटा हो या दाने हो या मसूड़ों से खून आ रहा हो तो हो सकता है कि संक्रमित खून दूसरे में चला जाये इसलिए गहन चुम्बन से परहेज करना चाहिए।

आप को कुछ बातो का ध्यान रखना जरूरी है जिससे संक्रमण न हो। रक्तदान के समय एड्स का संक्रमण न हो इस के लिए रक्तदाता के खून की जाँच होना आवश्यक है। यह भी आवश्यक है कि रक्त लेने और देने के लिए जिन सूइयों का प्रयोग हो रहा है, वे नई हों और अप्रयुक्त हों। चूँकि रक्त-आधान अस्पतालों या प्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा ही किया जाता है।
आज के समय में रक्तदान के द्वारा असावधानी होने पर एचआइवी का संक्रमण होने की संभावना कम है। ऐसा अगर होता है तो यह अपराध ही कहा जाएगा।

रक्त द्वारा संक्रमण होने की अधिक संभावना तब रहती है जब रोगी, या उस के साथी स्वयं गलत तरीके से सूइयों का प्रयोग करते हैं और उन की अदला बदली करते हैं।

आम तौर पर ऐसा तब होता है जब इंजेक्शन द्वारा नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले जूठी सूइयों का प्रयोग करते हैं। स्वास्थ्य कर्मचारियों, जो कई रोगियों के बीच काम करते हैं, के लिए भी रक्त द्वारा रोग संक्रमण का खतरा बना रहता है।

यदि आप स्वयं को या दूसरों को इंजेक्शन द्वारा दवाइयाँ दे रहे हैं तो इन बातों का ध्यान रखें हर बार नई, अप्रयुक्त या संक्रमण रहित सूई का प्रयोग करें।

इंजेक्शन इस्तेमाल करते समय संपर्क संबन्धी सावधानियाँ बरतें, जैसे फेंके जाने वाले दस्ताने पहनना, इंजेक्शन से पहले और बाद में साबुन और पानी से हाथ धोना, आदि।
 
माँ का शिशु को संक्रमण से बचाव:

यदि एक एच॰आइ॰वी॰ युक्त स्त्री गर्भवती हो जाती है तो नवजात शिशु के संक्रमित होने की संभावना काफी बढ़ जाती है गर्भ और प्रसव के दौरान माता को एंटीरेट्रोवाइरल दवाइयाँ दी जाएँ, जिस से शिशु के संक्रमित होने का खतरा कम हो जाता है। यदि अन्य हालात इजाज़त दें तो शिशु का जन्म सी-सेक्शन द्वारा कराया जाए।

इस से माता के द्रव्यों से बच्चे का संपर्क कम हो जाता है और संक्रमण का खतरा भी कम हो जाता है। यदि अन्य स्वीकार्य विकल्प उपलब्ध हों, तो शिशु को स्तनपान न कराया जाए। इससे आप और आप का बच्चा होने वाले संक्रमण से बचेंगे ।
 




 

एच आई वी कैसे काम करता है?

आप के शरीर में घुसने के बाद यह वायरस वाइट ब्लड सेल्स पर हमला करता
है और धीरे-धीरे उन्हें मारता रहता है। इन सेल्स के खत्म होने के बाद शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम होने लगती है। नतीजा यह होता है कि आए दिन शरीर में तरह तरह के इन्फेक्शन होने लगते हैं। यह एचआईवी इन्फेक्शन की आखिरी स्टेज है और इसी स्टेज को एड्स कहा जाता है।
 

HIV Ka ilaj:

एचआईवी का कोई इलाज नहीं है!! एक बार शरीर में आ जाने के बाद यह वायरस पूरी उम्र शरीर में रहता है। फिर भी दवाओं की मदद से एचआईवी पॉजिटिव होने से लेकर एड्स होने तक के गैप को बढ़ाया जा सकता है। कोशिश की जाती है कि एचआईवी पीड़ित शख्स लंबे समय तक बीमारियों से बचा रहे। यह वक्त कितना बढ़ाया जा सकता है, यह उस शख्स पर निर्भर करता है।

अलग-अलग मामलों में यह वक्त अलग-अलग हो सकता है। इसी तरह एड्स हो जाने के बाद व्यक्ति कितने दिनों तक जिंदा रहेगा, यह भी उसके अपने रहन-सहन, खानपान और इलाज पर निर्भर करता है। एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति को इलाज के दौरान एंटी-रेट्रोवायरल ड्रग्स दिए जाते हैं।
 

 

योग से एचआईवी में फायदा:

आप योगा करे जिससे आपको बिमारी कम होगी इसके लिए आपको हर रोज अनुलोम-विलोम प्राणायाम 10-20 मिनट तक करना चाहिए। उसके बाद आप भस्त्रिका 5 मिनट तक करें। इसमे भी आपको काफी फायदा होगा।
 
एचआईवी होने पर इन बातों का जरूर ध्यान रखें

अपने डॉक्टर से मिलकर एचआईवी इन्फेक्शन से संबंधित पूरा मेडिकल चेकअप कराएं। टीबी और एसटीडी का चेकअप भी जरूर करा लें। वह भी जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के मुताबिक दवाएं लें। दवाएं देख कर ही ले।

> महिलाएं डॉक्टर की सलाह के मुताबिक थोड़े-थोड़े दिनों बाद अपनी गाइनिकॉलिजकल जांच कराती रहें।

> ब्लड, प्लाज्मा, सीमेन या कोई भी बॉडी ऑर्गन डोनेट न करें।

> ऐसे मरीज को खून की जरूरत है, तो वह किसी स्वस्थ व्यक्ति का टेस्टेड ब्लड ले सकता है।

> अगर खांसी-जुकाम है तो सीधे डॉक्टर से मिलें। इसे न्यूमोनिया जैसी बड़ी बीमारी में तब्दील न होने दें। अगर शरीर में कोई कट है, तो उसकी दवा लें और बढ़ने से रोकें।

> ऐसे लोगों के मुंह में छाले हो सकते हैं। इससे खाने में दिक्कत हो सकती है। छालों को ठीक किया जा सकता है। डॉक्टर से मिलें और दवा लें। तब तक लिक्विड ही लें।

ध्यान दें: इसका कोई अभी संभव इलाज नही है लेकिन असंभव कुछ नही। एचआईवी के लिए कई ड़ाकटर पक्का ईलाज खोज रहे है इस बिमारी का एक भी लक्षण दिखाई दे तो जल्दी से किसी ड़ाकटर को दिखाये। और अपना ब्लड टेस्ट करवाये। आप संक्रमण से बचने के लिए बताऐ गए बचाव को ध्यान मे रखे जिससे आपको यह बिमारी कभी नही होगी।

आप खुद कोई भी ईलाज मत करे क्योंकि आपको नुकसान हो सकता है। इसलिए आप ड़ाकटर को अवश्य दिखाये। ड़ाकटर ही इस बिमारी को रोकने का प्रयास कर सकते है।

अगर आपका कोई सवाल हो तो आप पूँछ सकते हैं।

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