Atal Bihari Vajpayee कौन थे ? | Atal Bihari Vajpayee Full Information in Hindi

Atal Bihari Vajpayee Ji बहुत ही प्रभावशाली व्यक्तित्व के इंसान थे. अटल बिहारी वाजपेयी जी का नाम दादा श्री श्यामलाल वाजपेयी जी ने उनका नाम अटल रखा था. मां कृष्णादेवी उन्हें ‘अटल्ला’ कहकर पुकारती थीं. उनके पिता श्री कृष्ण बिहारी वाजपेयी जी हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी तीनों भाषाओं के विद्वान थे. इसी कारण अटल जी बचपन से ही भाषण-कला में माहिर हो गए थे. अटल बिहारी वाजपेयी जी तीन बार प्रधानमंत्री बने 1996 में पहली बार वह 13 दिन के लिए प्रधानमंत्री रहे. दूसरी बार वह 1998 से 1999 में 13 महीने के लिए प्रधानमंत्री रहे. और तीसरी बार वह पूरे 5 साल 1999-2004 के लिए प्रधानमंत्री मंत्री रहे.

 

 

अटल जी को शब्दों का जादूगर माना गया। विरोधी भी उनकी वाकपटुता और तर्कों के कायल रहे। 1994 में केंद्र की कांग्रेस सरकार ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में भारत का पक्ष रखने वाले प्रतिनिधिमंडल की नुमाइंदगी अटल जी को सौंपी थी। किसी सरकार का विपक्षी नेता पर इस हद तक भरोसे को पूरी दुनिया में आश्चर्य से देखा गया था।

गुजरात दंगों के समय सीएम रहे नरेंद्र मोदी के लिए अटल बिहारी वाजपेयी जी का यह बयान आज भी मील का पत्थर बना हुआ है कि- मेरा एक संदेश है कि वह राजधर्म का पालन करें। राजा के लिए, शासक के लिए प्रजा-प्रजा में भेद नहीं हो सकता। न जन्म के आधार पर, न जाति के आधार पर और न संप्रदाय के आधार पर।

Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi

Atal ji का पूरा नाम – Atal Bihari Vajpayee
Atal ji का जन्म – 25 December 1924
Atal ji की मृत्यु – 16 August 2018
Atal ji का जन्म स्थान – Gwalior, Madhya Pradesh
Atal ji की माता जी का नाम – Krishna Devi
Atal ji के पिता जी का नाम – krishna Bihari Vajpayee
राजनीति – Atal ji “Bhartiya Janta Party(BJP)” और इस देश के बहुत बड़े नेता थे.
 

अटल बिहारी जी की शिक्षा

अटल बिहारी जी की प्रारंभिक शिक्षा उनके निवास स्थान ग्वालियर में ही हुई उन्होंने अपनी स्कूल की शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर, गोरखी ,ग्वालियर से पूरी की। और उन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई विक्टोरिया (अब लक्ष्मीबाई) कॉलेज से हिंदी, संस्कृत, और इंग्लिश में पूरी की थी।

वे स्नातक की पढ़ाई करने के बाद आगे की पढाई के लिए कानपुर गए। उन्होने कानपुर के डीएवीवी कॉलेज से MA(Political Science) की पढ़ाई की। पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा होते ही उनकी रुची वकालत करने की होने लगी। उसके बाद उन्होंने एलएलबी में एडमिशन ले लिया।

 

अटल बिहारी वाजपेयी जी के गांव का परिचय

देश के 10वें प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था, लेकिन उनके परिवार की जड़ें यूपी के बटेश्वर से जुड़ी हुई हैं। बटेश्वर आगरा जिले में स्थित एक तहसील है। उनके दादा पंडित श्यामलाल वाजपेयी पैतृक गांव बटेश्वर को छोड़कर मध्य प्रदेश के मुरैना में जा बसे थे।

 

अटल बिहारी वाजपेयी जी द्वारा लिखित पुस्तकों की सूची

  • National Integration – 1961
  • India’s Foreign Policy: New Dimensions – 1977
  • Dynamics of an Open Society – 1977
  • Assam Problem: Repression no Solution – 1981
  • Atal Bihari Vaj Mem Tina Dasaka – 1992
  • Kucha Lekha, Kucha Bhashana – 1996
  • Sekyularavada: Bharatiya Parikalpana (Dr. Rajendra Prasada Smaraka Vyakhyanamala) – 1996
  • Rajaniti ki Rapatili Rahem – 1997
  • Back to Square One – 1998
  • Decisive Days – 1999
  • Sakti Se Santi – 1999
  • Pradhan Mantri Atal Bihari Vajpayee Ke Chune Hue Bhashana – 2000
  • Values, Vision & Verses of Vajpayee: India’s Man of Destiny – 2001
  • India’s Perspectives on ASEAN and the Asia-Pacific Region – 2003

 

Atal Bihari Vajpayee Poems in Hindi

  1. दूध में दरार पड़ गई
  2.  
    खून क्यों सफेद हो गया?
    भेद में अभेद खो गया.

    बंट गये शहीद, गीत कट गए,
    कलेजे में कटार दड़ गई.
    दूध में दरार पड़ गई.

    खेतों में बारूदी गंध,
    टूट गये नानक के छंद
    सतलुज सहम उठी, व्यथित सी बितस्ता है.

    वसंत से बहार झड़ गई
    दूध में दरार पड़ गई.

    अपनी ही छाया से बैर,
    गले लगने लगे हैं ग़ैर,
    ख़ुदकुशी का रास्ता, तुम्हें वतन का वास्ता.

    बात बनाएं, बिगड़ गई.
    दूध में दरार पड़ गई.
     

  3. कदम मिलाकर चलना होगा
  4.  
    बाधाएं आती हैं आएं
    घिरें प्रलय की घोर घटाएं,
    पावों के नीचे अंगारे,
    सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं,
    निज हाथों में हंसते-हंसते,
    आग लगाकर जलना होगा.
    कदम मिलाकर चलना होगा.

    हास्य-रूदन में, तूफानों में,
    अगर असंख्यक बलिदानों में,
    उद्यानों में, वीरानों में,
    अपमानों में, सम्मानों में,
    उन्नत मस्तक, उभरा सीना,
    पीड़ाओं में पलना होगा.
    कदम मिलाकर चलना होगा.

    उजियारे में, अंधकार में,
    कल कहार में, बीच धार में,
    घोर घृणा में, पूत प्यार में,
    क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,
    जीवन के शत-शत आकर्षक,
    अरमानों को ढलना होगा.
    कदम मिलाकर चलना होगा.

    सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ,
    प्रगति चिरंतन कैसा इति अब,
    सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ,
    असफल, सफल समान मनोरथ,
    सब कुछ देकर कुछ न मांगते,
    पावस बनकर ढलना होगा.
    कदम मिलाकर चलना होगा.

    कुछ कांटों से सज्जित जीवन,
    प्रखर प्यार से वंचित यौवन,
    नीरवता से मुखरित मधुबन,
    परहित अर्पित अपना तन-मन,
    जीवन को शत-शत आहुति में,
    जलना होगा, गलना होगा.
    क़दम मिलाकर चलना होगा.
     

  5. मनाली मत जइयो
  6.  
    मनाली मत जइयो, गोरी
    राजा के राज में.

    जइयो तो जइयो,
    उड़िके मत जइयो,
    अधर में लटकीहौ,
    वायुदूत के जहाज़ में.

    जइयो तो जइयो,
    सन्देसा न पइयो,
    टेलिफोन बिगड़े हैं,
    मिर्धा महाराज में.

    जइयो तो जइयो,
    मशाल ले के जइयो,
    बिजुरी भइ बैरिन
    अंधेरिया रात में.

    जइयो तो जइयो,
    त्रिशूल बांध जइयो,
    मिलेंगे ख़ालिस्तानी,
    राजीव के राज में.

    मनाली तो जइहो.
    सुरग सुख पइहों.
    दुख नीको लागे, मोहे
    राजा के राज में.
     

  7. एक बरस बीत गया
  8.  
    झुलासाता जेठ मास
    शरद चांदनी उदास
    सिसकी भरते सावन का
    अंतर्घट रीत गया
    एक बरस बीत गया

    सीकचों मे सिमटा जग
    किंतु विकल प्राण विहग
    धरती से अम्बर तक
    गूंज मुक्ति गीत गया
    एक बरस बीत गया

    पथ निहारते नयन
    गिनते दिन पल छिन
    लौट कभी आएगा
    मन का जो मीत गया
    एक बरस बीत गया
     

  9. आओ फिर से दिया जलाएं
  10.  
    भरी दुपहरी में अँधियारा
    सूरज परछाई से हरा,
    अंतरतम का नेह निचोड़े, बुझी हुई बाती सुलगाएँ।
    आओ फिर से दिया जलाएं।

    हम पड़ाव को समझें मंजिल,
    लक्ष्य हुआ आँखों से ओझल,
    वर्तमान के मोहजाल में, आने वाला कल न भुलाएँ।
    आओ फिर से दिया जलाएं।

    आहूति बाकी यज्ञ अधूरा,
    अपनों के विघ्नों ने घेरा,
    अंतिम जय का वज्र बनाने,
    नव दधीचि हड्डियाँ गलाएँ।
    आओ फिर से दिया जलाएँ।
     

  11. ठन गई! मौत से ठन गई
  12.  
    जूझने का मेरा इरादा न था,
    मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था,

    रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई,
    यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई।

    मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं,
    ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं।

    मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं,
    लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूं?

    तू दबे पांव, चोरी-छिपे से न आ,
    सामने वार कर फिर मुझे आज़मा।

    मौत से बेख़बर, ज़िन्दगी का सफ़र,
    शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर।

    बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं,
    दर्द अपने-पराए कुछ कम भी नहीं।

    प्यार इतना परायों से मुझको मिला,
    न अपनों से बाक़ी हैं कोई गिला।

    हर चुनौती से दो हाथ मैंने किये,
    आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए।

    आज झकझोरता तेज़ तूफ़ान है,
    नाव भंवरों की बांहों में मेहमान है

    पार पाने का क़ायम मगर हौसला,
    देख तेवर तूफ़ां का, तेवरी तन गई।

    मौत से ठन गई।
     

  13. टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते
  14.  
    सत्य का संघर्ष सत्ता से
    न्याय लड़ता निरंकुशता से
    अंधेरे ने दी चुनौती है
    किरण अंतिम अस्त होती है

    दीप निष्ठा का लिये निष्कंप
    वज्र टूटे या उठे भूकंप
    यह बराबर का नहीं है युद्ध
    हम निहत्थे, शत्रु है सन्नद्ध
    हर तरह के शस्त्र से है सज्ज
    और पशुबल हो उठा निर्लज्ज

    किन्तु फिर भी जूझने का प्रण
    अंगद ने बढ़ाया चरण
    प्राण-पण से करेंगे प्रतिकार
    समर्पण की मांग अस्वीकार

    दांव पर सब कुछ लगा है, रुक नहीं सकते
    टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते।

 

Atal Bihari Vajpayee जी को कोनसे पुरस्कार मिले ?

> 1992 में Atal Bihari Vajpayee Ji को पद्मा विभूषण पुरस्कार मिला था.
> 1994 में Atal Bihari Vajpayee Ji को लोकमान्य तिलक पुरस्कार मिला था.
> 1994 में Atal Bihari Vajpayee Ji को श्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार मिला था.
> 1994 में Atal Bihari Vajpayee Ji को पंडित बल्लभ पंत पुरस्कार मिला था.
> 2014 में Atal Bihari Vajpayee Ji को भारत रत्न पुरस्कार मिला था.
 

 

अटल बिहारी वाजपेयी जी का हिंदी प्रेम:

अटल बिहारी वाजपेयी ने हिंदी को विश्वस्तर पर मान दिलाने के लिए बहुत से प्रयास किए। 1977 में जनता सरकार में विदेश मंत्री थे तब उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के 32वें अधिवेशन में हिंदी में भाषण दिया था जो बहुत लोकप्रिय हुआ था। अटल बिहारी वाजपेयी जी संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण देने वाले पहले व्यक्ति कवि, लेखक, पत्रकार और राजनेता थे. उनके द्वारा हिंदी के चुने हुए शब्दों का ही असर था कि यूएन के प्रतिनिधियों ने खड़े होकर अटल जी के लिए तालियां बजाईं थीं।

 

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन:

अटल बिहारी वाजपेयी जी लंबे समय से बीमार चल रहे थे . 93 वर्ष के वाजपेयी जी जून महीने से ही नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती थे. एम्स ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी ने 16 August 2018 को गुरुवार की शाम पाँच बजकर पाँच मिनट पर अंतिम सांस ली. उन्हें इसी वर्ष जून में किडनी में संक्रमण और कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से एम्स में भर्ती कराया गया था. अटल बिहारी वाजपेयी जी का शव शुक्रवार को नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के Headquarter में श्रद्धांजलि के लिए रखा गया था. उनकी अंतिम क्रिया विजयघाट पर की गयी थी. अटल बिहारी वाजपेयी जी के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि अटल जी के निधन से एक युग का अंत हो गया है. अटल जी का अंतिम संस्कार राजघाट के शांतिवन में बने स्मृति स्थल में किया गया और वहीं उनकी समाधि भी बनाई जाएगी। मॉरिशस के लोग अटल जी का बहुत सम्मान करते थे, अटल बिहारी वाजपेयी जी निधन के पर मॉरिशस ने अपने झंडे को आधा झुकाया था।

 

 

अटल बिहारी वाजपेयी जी के अनमोल विचार:

  • छोटे मन से कोई बड़ा नही होता, टूटे हुए मन से कोई खड़ा नही होता
  • मैं हिन्दू परम्परा में गर्व महसूस करता हूं लेकिन मुझे भारतीय परम्परा में और ज्यादा गर्व है।
  • मुझे अपने हिंदुत्व पर अभिमान है, किंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि मैं मुस्लिम विरोधी हूं।
  • निराशा की अमावस की गहन दिशा के अंधकार में हम अपना मस्तक आत्म-गौरव के साथ तनिक ऊँचा उठाकर देखें।
  • आप दोस्तों को बदल सकते हैं लेकिन पड़ोसियों को नहीं।
  • जो लोग हमें पूछते हैं कि हम पाकिस्तान के साथ वार्ता कब करेंगे शायद वे यह नहीं जानते हैं की पिछले 55 सालों में, पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए हर पहल निरपवाद रूप से भारत ने ही की है।
  • वैश्विक स्तर पर आज परस्पर निर्भरता का मतलब विकाशशील देशों में आर्थिक आपदाओं का विकसित देशों पर प्रतिघात करना होगा।
  • मै मरने से नही डरता हूँ, बल्कि बदनामी होने से डरता हूँ
  • हमारा देश एक मन्दिर है और हम इसके पुजारी, हमे राष्ट्रदेव की पूजा में खुद को समर्पित कर देना चाहिए
  • मौत की उम्र क्या दो पल भी नही, जिन्दगी की सिलसिला, आज कल की नही
    मै जी भर जिया, मै मन से मरु, लौट के आउगा, फिर कुच से क्यों डरु |
  • भारत के प्रति निष्ठा रखने वाले सभी भारतीय एक है भले ही उनका मजहब, जाति, प्रदेश अलग ही क्यों न हो
  • हर इन्सान को चाहिए वह परिस्थितियों से लड़े, एक स्वप्न टूटे तो दूसरा गढ़े |
  • मै चाहता हु भारत फिर से एक महान राष्ट्र बने, शक्तिशाली बने, पूरे विश्व के राष्ट्रों में पहला स्थान पाए
  • हमारे पड़ोसी कहते है की एक हाथ से ताली नही बजती, हमने कहा चुटकी तो बज ही सकती है
  • जलना होगा, गलना होगा और हमे कदम मिलकर एक साथ चलना होगा
  • मजहब बदल लेने से राष्ट्रीयता नही बदलती और ना ही संस्कृति में परिवर्तन होता है
  • टूट सकते है मगर हम झुक नही सकते

 

अटल बिहारी वाजपेयी जी जन्म हम किस रूप में मानते हैं ?

अटल बिहारी वाजपेयी जी एक महान थे। अटल बिहारी वाजपेयी जी जन्म ‘Good Governance Day’ के रूप में मानते हैं।

 
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